एक नई माँ बनना दुनिया के सबसे खूबसूरत अनुभवों में से एक है, लेकिन इसके साथ आती हैं कई चुनौतियाँ और जिम्मेदारियाँ। इन सबमें सबसे महत्वपूर्ण है ब्रेस्टफीडिंग (स्तनपान)। अक्सर नई माताएँ अनजाने में कुछ ऐसी गलतियाँ कर बैठती हैं, जिनका सीधा असर बच्चे की ग्रोथ और माँ की सेहत पर पड़ सकता है।
वेदांत क्लिनिक (केशव नगर) की कंसलटेंट गायनेकोलॉजिस्ट डॉक्टर गौरी जगदाळे इस वीडियो के माध्यम से ऐसी ही 7 कॉमन मिस्टेक्स के बारे में बता रही हैं, जिन्हें सुधारकर आप अपने ब्रेस्टफीडिंग के सफर को आसान बना सकती हैं।
सबसे पहली और बड़ी गलती है बच्चे का सही तरीके से ब्रेस्ट को न पकड़ पाना। अगर बच्चा सिर्फ निप्पल को पकड़ता है, तो इससे माँ को बहुत दर्द होता है और बच्चे तक पर्याप्त दूध भी नहीं पहुँचता।
सही तरीका: बच्चे के मुँह में निप्पल के साथ-साथ अरेला (Areola – निप्पल के चारों ओर का काला हिस्सा) का अधिकतम भाग जाना चाहिए। इससे दूध की सप्लाई अच्छी होती है और दर्द भी नहीं होता।
कई माँएं घड़ी देखकर हर 2 या 3 घंटे में बच्चे को दूध पिलाती हैं, जो कि गलत है।
सही तरीका: बच्चे को हमेशा ‘ऑन डिमांड’ (On Demand) फीड कराएं। जब भी बच्चा रोए, होंठ सिकोड़े (lip sucking) या दूध के लिए सिर घुमाए (rooting), तब उसे फीड कराएं।
अगर फीड कराते समय बच्चे का सिर और शरीर एक सीधी रेखा में नहीं है, तो उसे दूध पीने में मुश्किल होगी।
सही तरीका: बच्चे का पेट और माँ का पेट आपस में संपर्क (contact) में होना चाहिए। आप बच्चे को सही ऊंचाई पर रखने के लिए पिलो (तकिया) का इस्तेमाल कर सकती हैं ताकि उसका सिर और शरीर एक लाइन में रहे।
कुछ लोग 5-10 मिनट फीड कराकर बच्चे को हटा देते हैं। यह बच्चे के वजन बढ़ने में बाधक हो सकता है।
सही तरीका: एक तरफ का ब्रेस्ट पूरी तरह खाली (empty) होने दें। शुरुआती दूध (Fore milk) में ज्यादातर पानी होता है, जबकि बाद का दूध (Hind milk) पोषक तत्वों और फैट से भरपूर होता है, जिससे बच्चे का वजन बढ़ता है।
बच्चे की देखभाल के चक्कर में अक्सर नई माँएं अपना खाना-पीना भूल जाती हैं, जिससे दूध की सप्लाई कम हो सकती है।
सही तरीका: अपनी डाइट में भरपूर पानी, प्रोटीन युक्त भोजन और एक्स्ट्रा कैलोरी शामिल करें। माँ का हाइड्रेटेड और स्वस्थ रहना ब्रेस्ट मिल्क सप्लाई के लिए बहुत जरूरी है।
बच्चा थोड़ा भी रोता है, तो माँ को लगता है कि उसे पूरा दूध नहीं मिल रहा और वे ‘फॉर्मूला मिल्क’ शुरू कर देती हैं।
सही तरीका: याद रखें कि आप जितना ज्यादा और बार-बार ब्रेस्टफीड कराएंगी, दूध की सप्लाई उतनी ही बढ़ेगी। बिना डॉक्टरी सलाह के जल्दी फॉर्मूला मिल्क शुरू न करें।
ब्रेस्टफीडिंग एक तकनीक है जिसे सीखने में थोड़ा समय लगता है। कई बार दर्द या मुश्किलों की वजह से माँएं हार मान लेती हैं।
सही तरीका: खुद पर भरोसा रखें। समय के साथ आप इसमें एक्सपर्ट हो जाएंगी। यह कोई परफेक्ट साइंस नहीं है, बल्कि एक अनुभव है जो धीरे-धीरे बेहतर होता है।
निष्कर्ष: ब्रेस्टफीडिंग कोई मुश्किल काम नहीं है, बस इसे सही मार्गदर्शन और धैर्य की जरूरत है। अगर आपको इस दौरान कोई परेशानी महसूस हो रही है, तो अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें।
हमें कमेंट्स में बताएं: आपको ब्रेस्टफीडिंग के सफर में सबसे चुनौतीपूर्ण क्या लगता है?
स्वस्थ रहें, खुश रहें और अपनी पेरेंटहुड का आनंद लें!
Dr. Gauri Jagdale is a specialist Gynaecologist & Obstetrician with 8 years of experience, practicing at Vedant Clinic, Keshavnagar, Mundhwa. She specializes in Infertility treatment, High-Risk Pregnancy, and Cosmetic Gynaecology.
For 7 years, Vedant Clinic has served Mundhwa, Keshavnagar, Magarpatta City, Amanora City, Hadapsar, Kharadi, Wagholi, Ghorpadi, and Manjari.
As a Consultant at Motherhood Hospital, Kharadi (OPD 2pm-4pm), she ensures patients have access to world-class delivery facilities. From routine prenatal care to advanced fertility solutions, Dr. Gauri offers personalized medical excellence for women across Pune. Book your consultation today.