प्रेगनेंसी में थैलेसीमिया स्क्रीनिंग: क्यों है जरूरी? पूरी जानकारी

प्रेगनेंसी में थैलेसीमिया स्क्रीनिंग: क्यों है जरूरी? पूरी जानकारी

प्रेगनेंसी की खबर सुनते ही घर में खुशियों का माहौल हो जाता है, लेकिन इसके साथ ही शुरू होता है चेकअप और टेस्ट्स का सिलसिला। अक्सर डॉक्टर गर्भवती महिलाओं को Thalassemia Screening कराने की सलाह देते हैं।

कई महिलाओं के मन में सवाल आता है कि आखिर यह टेस्ट क्या है? क्या इससे मेरे होने वाले बच्चे को कोई खतरा है? वेदांत क्लिनिक, केशव नगर की कंसलटेंट गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. गौरी जगदाळे बता रही हैं थैलेसीमिया और प्रेगनेंसी से जुड़ी हर जरूरी बात।

Thalassemia क्या होता है? (What is Thalassemia?)

थैलेसीमिया खून (Heamoglobin) से जुड़ी एक स्थिति है। इसमें शरीर में हीमोग्लोबिन या तो कम बनता है या फिर एब्नॉर्मल (Abnormal) होता है।

हीमोग्लोबिन का मुख्य काम बच्चे तक ऑक्सीजन पहुँचाना है। अगर यह सही मात्रा में न हो, तो बच्चे को ऑक्सीजन और खून की कमी हो सकती है। ध्यान रखें कि थैलेसीमिया:

  • कोई इन्फेक्शन (Infection) नहीं है।

  • यह खराब लाइफस्टाइल की वजह से नहीं होता।

  • यह एक जेनेटिक कंडीशन (Genetic Condition) है, जो माता-पिता से बच्चे में जींस के जरिए ट्रांसफर होती है।

प्रेगनेंसी में स्क्रीनिंग क्यों जरूरी है?

शुरुआती प्रेगनेंसी में ही थैलेसीमिया स्क्रीनिंग कराना बेहद महत्वपूर्ण है। इससे यह पता चलता है कि बच्चे को इस बीमारी का कितना जोखिम है।

स्क्रीनिंग कैसे की जाती है?

इसकी जांच दो तरह से होती है:

  1. हीमोग्लोबिन लेवल चेक करके।

  2. HB Electrophoresis टेस्ट के जरिए।

टेस्ट के नतीजों (Results) का क्या मतलब है?

थैलेसीमिया स्क्रीनिंग के रिजल्ट्स को समझना बहुत जरूरी है:

  • Case 1 (Mother is Carrier): अगर मां थैलेसीमिया कैरियर है, तो पिता का टेस्ट कराया जाता है।

  • Case 2 (Father is Normal): अगर मां कैरियर है लेकिन पिता नॉर्मल हैं, तो घबराने की कोई बात नहीं है।

  • Case 3 (Both are Carriers): अगर माता-पिता दोनों कैरियर हैं, तो बच्चे को थैलेसीमिया होने का रिस्क होता है। ऐसी स्थिति में जेनेटिक काउंसलिंग और बच्चे के लिए कुछ विशेष टेस्ट की सलाह दी जाती है।

थैलेसीमिया को कैसे मैनेज करें? (Management Tips)

अगर आपकी स्क्रीनिंग पॉजिटिव आती है, तो पैनिक न हों। इसे सही मैनेजमेंट से संभाला जा सकता है:

  1. आयरन रिच डाइट (Iron Rich Food): अपने खाने में हीमोग्लोबिन बढ़ाने वाली चीजें शामिल करें जैसे— हरी सब्जियां, खजूर (Dates), और ड्राई फ्रूट्स।

  2. नियमित चेकअप: डॉक्टर द्वारा बताए गए हीमोग्लोबिन लेवल को मेंटेन रखें।

  3. डॉक्टर की सलाह: अगर रिपोर्ट पॉजिटिव है, तो बिना देरी किए अपने गायनेकोलॉजिस्ट से मिलें और आगे की जरूरी जांच करवाएं।

निष्कर्ष (Conclusion)

अगर आप प्रेग्नेंट हैं या प्रेगनेंसी प्लान कर रही हैं, तो थैलेसीमिया स्क्रीनिंग को नजरअंदाज न करें। यह एक छोटा सा टेस्ट आपके बच्चे के सुरक्षित भविष्य की गारंटी दे सकता है।

Stay Healthy, Stay Happy!