पेट का आकार देखकर बता सकते हैं लड़का है या लड़की? डॉ. गौरी जगदाले ने तोड़े ये 6 बड़े मिथक
जैसे ही प्रेगनेंसी टेस्ट पॉजिटिव आता है, घर में एक ही चर्चा शुरू हो जाती है— “लड़का होगा या लड़की?” दादा-दादी, नाना-नानी, पड़ोसी और रिश्तेदार अपने-अपने तजुर्बे से भविष्यवाणी करने लगते हैं। कोई पेट का आकार देखता है तो कोई खाने की पसंद।
वेदांत क्लिनिक, केशव नगर की डॉ. गौरी जगदाले (Gynecologist & Obstetrician) का कहना है कि यह उत्सुकता होना स्वाभाविक है, लेकिन समाज में फैले ये दावे सिर्फ मिथक (Myths) हैं।
सबसे पहले, एक जरूरी चेतावनी: भारत में जन्म से पहले लिंग जांच (Sex Determination) करना कानूनी अपराध है। डॉक्टर से इसके बारे में पूछना या जांच करना सख्त मना है।
आइए जानते हैं उन 6 आम बातों की सच्चाई जिन्हें लोग सच मान बैठते हैं।
1. मिथक: पेट का आकार (Baby Bump Shape)
कहावत: अगर पेट आगे की तरफ निकला है तो लड़का, और अगर साइड में फैला है तो लड़की। सच्चाई: डॉ. गौरी कहती हैं कि पेट का आकार पूरी तरह से माँ की मांसपेशियों (Muscle tone), बच्चे की पोजीशन और यह आपकी कौन सी प्रेगनेंसी है, इस पर निर्भर करता है। इसका जेंडर से कोई लेना-देना नहीं है।
2. मिथक: प्लेसेंटा की पोजीशन
कहावत: सोनोग्राफी में प्लेसेंटा राइट साइड है तो लड़का, लेफ्ट है तो लड़की। सच्चाई: यह गलत है। प्लेसेंटा गर्भाशय में कहाँ जुड़ेगा (Implantation), यह एक रैंडम प्रक्रिया है। इसका बच्चे के लिंग से कोई संबंध नहीं है।
3. मिथक: उल्टियाँ (Vomiting/Morning Sickness)
कहावत: ज्यादा उल्टियाँ मतलब लड़की, कम मतलब लड़का। सच्चाई: उल्टियाँ प्रेगनेंसी में हार्मोनल बदलाव (Hormonal Changes) के कारण होती हैं, जेंडर के कारण नहीं। हर महिला का अनुभव अलग होता है।
4. मिथक: चेहरे की चमक (Glow)
कहावत: चेहरे पर ग्लो है तो लड़का, अगर चेहरा डल (Dull) हो गया है तो लड़की। सच्चाई: जिसे हम “प्रेगनेंसी ग्लो” कहते हैं, वह बढ़े हुए ब्लड फ्लो और हार्मोन्स का नतीजा है। यह किसी भी जेंडर में हो सकता है।
5. मिथक: खाने की क्रेविंग्स (Cravings)
कहावत: मीठा खाने का मन है तो लड़की, तीखा या खट्टा खाने का मन है तो लड़का। सच्चाई: क्रेविंग्स शरीर में किसी पोषक तत्व की कमी (Nutritional Deficiency) या हार्मोनल बदलाव के कारण होती हैं। यह सिर्फ आपकी पर्सनल पसंद है।
6. मिथक: हार्ट बीट (Heart Rate)
कहावत: धड़कन तेज (140 से ऊपर) है तो लड़की, धीमी है तो लड़का। सच्चाई: बच्चे की हार्ट बीट 110 से 160 के बीच कभी भी बदल सकती है। यह इस पर निर्भर करता है कि माँ ने पानी पिया है या नहीं, या बच्चा सो रहा है या जाग रहा है।
असली साइंस क्या कहती है? (The Scientific Truth)
डॉ. गौरी बताती हैं कि लड़का होगा या लड़की, यह पूरी तरह से पिता (Father) के क्रोमोसोम्स पर निर्भर करता है, न कि माँ पर।
- माँ के पास सिर्फ X क्रोमोसोम होते हैं।
- पिता के पास X और Y दोनों होते हैं।
- अगर पिता का X मिला तो लड़की।
- अगर पिता का Y मिला तो लड़का।
निष्कर्ष
अगली बार अगर कोई आपको पेट देखकर या अंगूठी घुमाकर (Ring Test) बताए कि क्या होने वाला है, तो बस मुस्कुरा कर बात टाल दें।
डॉ. गौरी का संदेश है— “लड़का हो या लड़की, दोनों प्यारे होते हैं और दोनों समान रूप से महत्वपूर्ण हैं।”
एक स्वस्थ बच्चे की कामना करें और अपनी प्रेगनेंसी एन्जॉय करें।
“स्टे हैप्पी, स्टे हेल्दी, बी पॉजिटिव!”