7 Months Pregnant: इस महीने क्या खाएं और किन गलतियों से बचें?
प्रेगनेंसी का सफर अब अपने आखिरी और सबसे रोमांचक पड़ाव यानी तीसरी तिमाही (Third Trimester) में प्रवेश कर चुका है। सातवां महीना लगते ही घर में नन्हे मेहमान के आने की आहट तेज हो जाती है। लेकिन, जैसे-जैसे बच्चे का विकास तेज होता है, मम्मी की जिम्मेदारियां भी बढ़ जाती हैं।
आज के इस ब्लॉग में हम जानेंगे कि सातवें महीने में आपके शरीर और बच्चे में क्या बदलाव आते हैं और आपको किन बातों का खास ख्याल रखना चाहिए।
बच्चे का विकास: अब कितना बड़ा हो गया है आपका बेबी?
सातवें महीने में बच्चा काफी तेजी से बढ़ता है।
वजन: इस समय बच्चे का वजन लगभग 1200 से 1500 ग्राम के बीच होता है।
पोजीशन: ज्यादातर बच्चे अब अपना सिर नीचे की तरफ (Head-down position) करना शुरू कर देते हैं, जो नॉर्मल डिलीवरी के लिए सही संकेत है।
मूवमेंट: बच्चे की हलचल पर नजर रखना अब सबसे जरूरी काम है। दिनभर में कम से कम 10 से 12 बार बच्चे की मूवमेंट महसूस होनी चाहिए।
शरीर में होने वाले बदलाव और चुनौतियां
जैसे-जैसे पेट का आकार बढ़ता है, मम्मी को कुछ शारीरिक दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है:
पीठ दर्द (Backache): बढ़ते वजन के कारण कमर और पीठ में दर्द होना आम है।
पैरों में सूजन (Edema): ज्यादा देर खड़े रहने से पैरों में हल्की सूजन आ सकती है।
सांस फूलना और नींद की कमी: पेट के दबाव के कारण सांस लेने में भारीपन और सोने में असहजता महसूस हो सकती है।
डॉक्टर की विजिट और जरूरी टेस्ट
अब आपको अपने डॉक्टर से हर दो हफ्ते (Fortnightly) में मिलना चाहिए। इस दौरान डॉक्टर निम्नलिखित जांचें करेंगे:
ब्लड प्रेशर और वजन की जांच।
ब्लड टेस्ट: हीमोग्लोबिन, थायराइड और शुगर (GTT) की जांच ताकि कोई कॉम्प्लिकेशन न हो।
ग्रोथ स्कैन (Sonography): यह बहुत महत्वपूर्ण है। इससे बच्चे का वजन, एमनियोटिक फ्लूइड (पानी) की मात्रा, प्लासेंटा की स्थिति और ब्लड फ्लो का पता चलता है।
खतरे के संकेत (Warning Signs): इन्हें नजरअंदाज न करें
सातवें महीने के बाद कुछ रिस्क बढ़ जाते हैं, जिनके प्रति आपको सजग रहना चाहिए:
प्रीटर्म लेबर: समय से पहले दर्द शुरू होना।
पानी का छूटना (Water Breaking): अगर अचानक योनि से पानी जैसा रिसाव हो।
ब्लीडिंग: किसी भी तरह का रक्तस्राव (खासकर लो-लाइंग प्लासेंटा के मामले में)।
हलचल में कमी: अगर बच्चा सामान्य से बहुत कम या बहुत ज्यादा हलचल करे।
नोट: इनमें से कोई भी लक्षण दिखने पर तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करें।
तैयारी जीत की: हॉस्पिटल बैग और गोद भराई
अब समय है आने वाले कल की तैयारी का!
हॉस्पिटल बैग: अपने सारे मेडिकल रिकॉर्ड्स, बच्चे के कपड़े और अपने लिए मैटरनिटी वियर एक बैग में तैयार रखें ताकि इमरजेंसी में भागदौड़ न हो।
खुशियां मनाएं: भारत में सातवां महीना ‘गोद भराई’ के रूप में मनाया जाता है। परिवार के साथ इस समय का आनंद लें, खुश रहें और तनाव से दूर रहें।
निष्कर्ष
सातवां महीना प्रेगनेंसी की एक नई कहानी लेकर आता है। सावधानी और सही जानकारी के साथ आप इस सफर को सुरक्षित बना सकती हैं। अगले ब्लॉग में हम बात करेंगे आठवें महीने के बारे में।